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Sunday, June 23, 2024

भवान्यष्टकम् - माँ भवानी की अष्टक-स्तुति

जय माँ भवानि

          आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित यह माँ भवानि की अष्टक-स्तुति न सिर्फ मधुर है बल्कि इसका संस्कृत सरल एवं सुगम भी है। "सबकुछ छोड़ कर एकमात्र माँ भवानी की शरण" में जाने का भाव इस स्तुति को विशेष बनाता है। जिस प्रकार बालक के लिए सिर्फ माँ ही मायने रखती है उसी प्रकार सब से मोह त्यागकर जब हम एकमात्र माँ भवानी की ही शरण में जाते हैं तब वे अवश्य मातृभाव से हमारा पालन करती हैं, हमारा ध्यान रखती हैं। 

      स्तुति के बाद इसका अर्थ भी दिया गया है। यह अष्टक-स्तुति अर्थ सहित गीता प्रेस से साभार लिया गया है। 

    इस स्तुति को आप यूट्यूब पर भी सुन सकते हैं जिसे अर्थ के ठीक नीचे एम्बेड किया गया है। लिंक यहाँ है।  

भवान्यष्टकम्

(माँ भवानि की अष्टक-स्तुति)


न तातो  न माता  न बन्धुर्न दाता

न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता |

न जाया  न  विद्या  न वृत्तिर्ममैव

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||1||


भवाब्धावपारे   महादुःखभीरुः

पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः |

कुसंसारपाशप्रबद्धः      सदाहं

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||2||


न जानामि  दानं   न च  ध्यानयोगं

न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् |

न जानामि  पूजां  न  च  न्यासयोगं

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||3||


न  जानामि  पुण्यं   न जानामि तीर्थं

न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् |

न जानामि  भक्तिं  व्रतं  वापि  मातः

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||4||


कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः

कुलाचारहीनः     कदाचारलीनः |

कुदृष्टिः    कुवाक्यप्रबन्धः    सदाहं

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||5||


प्रजेशं    रमेशं     महेशं     सुरेशं

दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् |

न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||6||


विवादे  विषादे  प्रमादे प्रवासे

जले  चानले  पर्वते  शत्रुमध्ये  |

अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||7|| 


अनाथो    दरिद्रो    जरारोगयुक्तो

महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः|

विपत्तौ    प्रविष्टः    प्रणष्टः    सदाहं

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ||8||

===O===

अर्थ : हे भवानि! पिता, माता, भाई, दाता, पुत्र, पुत्री,भृत्य, स्वामी, स्त्री, विद्या और वृत्ति - इनमें से कोई भी मेरा नहीं है , हे देवि ! अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।| 1||

     मैं अपार भवसागर में पड़ा हूँ, महान दुखों से भयभीत हूँ; कामी, लोभी, मतवाला तथा संसार के घृणित बंधनों में बंधा हुआ हूँ, हे भवानि ! अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।| 2 || 

      हे भवानि ! मैं न तो दान देना जानता हूँ और न ध्यानमार्ग का ही मुझे पता है, तंत्र और स्तोत्र-मन्त्रों का भी मुझे ज्ञान नहीं है, पूजा तथा न्यास आदि की क्रियाओं से तो मैं एकदम कोरा हूँ, अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।| 3 ||  

         न मैं पुण्य जानता हूँ न तीर्थ, न मुक्ति का पता है न लय का। हे मातः ! भक्ति और व्रत भी मुझे ज्ञात नहीं है, हे भवानि ! अब केवल तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।| 4 ||  

        मैं कुकर्मी, बुरी संगती में रहनेवाला, दुर्बुद्धि, दुष्टदास, कुलोचित सदाचार से हीन, दुराचारपरायण, कुत्सित दृष्टि रखने वाला और सदा दुर्वचन बोलने वाला हूँ, हे भवानि ! मुझ अधम की अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।|5 ||  

    मैं ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इंद्र, सूर्य, चन्द्रमा तथा अन्य किसी भी देवता को नहीं जानता, हे शरण देने वाली भवानि ! अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।|6 ||   

     हे शरण्ये ! तुम विवाद, विषाद, प्रमाद, परदेश, जल, अनल, पर्वत, वन तथा शत्रुओं के मध्य में सदा ही मेरी रक्षा करो, हे भवानि ! अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।|7||

          हे भवानि ! मैं सदा से ही अनाथ, दरिद्र, जरा-जीर्ण, रोगी, अत्यंत दुर्बल, दीं, गूँगा, विपदग्रस्त और नष्टप्राय हूँ, अब एकमात्र तुम ही मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो।|8||   

===<<<O>>>===

















































                                                                 →यूट्यूब पर सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें













44. मिथिला के लोकप्रिय कवि विद्यापति रचित - गोसाओनिक गीत (Gosaonik Geet) अर्थ सहित

43. पौराणिक कथाओं में शल्य - चिकित्सा - Surgery in Indian mythology

42. सुन्दरकाण्ड के पाठ या श्रवण से हनुमानजी प्रसन्न हो कर सब बाधा और कष्ट दूर करते हैं

41. माँ काली की स्तुति - Maa Kali's "Stuti"

40. महाशिवरात्रि - Mahashivaratri                                


39. तुलसीदास - अनोखे रस - लालित्य के कवि

38. छठ महापर्व - The great festival of Chhath

37. भगवती प्रार्थना - बिहारी गीत (पाँच वरदानों के लिए)

36. सावन में पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक




25. भगवती स्तुति। .... देवी दुर्गा उमा, विश्वजननी रमा......

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24. कृष्ण -जन्माष्टमी -- परमात्मा के पूर्ण अवतार का समय। 

23. क्या सतयुग में पहाड़ों के पंख हुआ करते थे?

22. सावन में शिवपूजा। ..... Shiva Worship in Savan  

21. सद्गुरु की खोज ---- Search of a Satguru! True Guru!

20. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अद्भुत कथा  ....
(The great doctors of Gods-Ashwinikumars !). भाग - 4 (चिकित्सा के द्वारा चिकित्सा के द्वारा अंधों को दृष्टि प्रदान करना)
19. God does not like Ego i.e. अहंकार ! अभिमान ! घमंड !

18. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -3 (चिकित्सा के द्वारा युवावस्था प्रदान करना)

17. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -2 (चिकित्सा के द्वारा युवावस्था प्रदान करना)


16. बाबा बासुकीनाथ का नचारी भजन -Baba Basukinath's "Nachari-Bhajan" !

15. शिवषडक्षर स्तोत्र (Shiva Shadakshar Stotra-The Prayer of Shiva related to Six letters)

14. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -१ (अश्विनीकुमार और नकुल- सहदेव का जन्म)

13. पवित्र शमी एवं मन्दार को वरदान की कथा (Shami patra and Mandar phool)

12. Daily Shiva Prayer - दैनिक शिव आराधना

11. Shiva_Manas_Puja (शिव मानस पूजा)

10. Morning Dhyana of Shiva (शिव प्रातः स्मरण) !

09. जप कैसे करें ?

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08. पूजा में अष्टक का महत्त्व ....Importance of eight-shloka- Prayer (Ashtak) !

07. संक्षिप्त लक्ष्मी पूजन विधि...! How to Worship Lakshmi by yourself ..!!

06. Common misbeliefs about Hindu Gods ... !!

05. Why should we worship Goddess "Durga" ... माँ दुर्गा की आराधना क्यों जरुरी है ?

04. Importance of 'Bilva Patra' in "Shiv-Pujan" & "Bilvastak"... शिव पूजन में बिल्व पत्र का महत्व !!

03. Bhagwat path in short ..!! संक्षिप्त भागवत पाठ !!         {Listen it in only three minutes on YouTube}

02. What Lord Shiva likes .. ? भगवान शिव को क्या क्या प्रिय है ?

01. The Sun and the Earth are Gods we can see .....




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Sunday, November 19, 2023

सप्तश्लोकी दुर्गा - Prayer of Durga in seven Shlokas- हिन्दी ब्लॉग

   
माँ दुर्गा दुर्गतिनाशिनी
 माँ दुर्गा की आराधना भक्तजन अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए करते हैं। इसके लिए श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ सर्वोत्तम है विशेषकर नवरात्रों में। किन्तु सात सौ श्लोकों जिनके आगे पीछे रात्रिसूक्त, देवीसूक्त, रहस्य आदि मिलाकर पढ़ना होता है, बहुत ही समय लेने वाला है जिन्हें नित्य पढ़ना व्यस्त रहने वाले गृहस्थजनों के लिए संभव नहीं है। अतः कलियुग में भक्तों के कल्याण के लिए भगवान शिव ने दुर्गा जी से ही पूछा कि कामनाओं की सिद्धि का उपाय बतायें। तब देवी ने "अम्बा स्तुति" नामक यह उपाय बताया जो सात श्लोकों में देवी की स्तुति है। यह कलियुग में सभी कामनों को पूर्ण करने वाला है अतः भक्तजन नित्य पूजा में इस सप्तश्लोकि दुर्गा का पाठ को शामिल करें। यहाँ मैं गीता प्रेस से प्रकाशित "श्रीदुर्गासप्तशती" पुस्तक के प्रारम्भ में दिए गए सप्तश्लोकी दुर्गा और उसके अर्थ को दे रहा हूँ :- 

अथ सप्तश्लोकी दुर्गा
शिव उवाच -
देवी त्वं भक्तसुलभे     सर्वकार्यविधायिनी। 
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रुहि यत्नतः।। 
देव्युवाच - 
शृणु  देव  प्रवक्ष्यामि    कलौ  सर्वेष्टसाधनम्।
मया  तवैव  स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते।। 

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः,
श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः। 

ॐ ज्ञानिनामपि चेतान्सि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।1।। 

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ।।2।।

सर्वमङ्गल      मङ्गल्ये       शिवे     सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोSस्तु ते ।।3 ।।

शरणागतदीनार्त      परित्राण        परायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोSस्तु ते।।4।।

सर्वस्वरूपे      सर्वेशे      सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोSस्तु ते।।5।।

रोगानशेषानपहंसि  तुष्टा   रुष्टा   तु   कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।6।।

सर्वाबाधाप्रशमनं       त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्।।7।।

|| इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्णा ||

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इस पोस्ट को नीचे एम्बेडेड यूट्यूब में भी देख सकते हैं 👇




भावार्थ
शिवजी बोले - हे देवी ! तुम भक्तों के लिए सुलभ हो और समस्त कर्मों का विधान करने वाली हो। कलियुग में कामनाओं की सिद्धि-हेतु यदि कोई उपाय हो तो उसे अपनी वाणी द्वारा सम्यक्-रूप से व्यक्त करो। 

देवी ने कहा - हे देव ! आपका मेरे ऊपर बहुत स्नेह है। कलियुग में समस्त कामनाओं को सिद्ध करने वाला जो साधन है वह बतलाऊँगी, सुनो !उसका नाम है 'अम्बास्तुति'। 
         
          ॐ इस दुर्गासप्तश्लोकी स्तोत्रमंत्र के नारायण ऋषि हैं, अनुष्टुप् छन्द है, श्रीमहाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवता हैं, श्री दुर्गा की प्रसन्नता के लिए सप्तश्लोकी दुर्गापाठ में इसका विनियोग किया जाता है।   

       वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींच कर मोह में डाल देती हैं।।1।।

     माँ दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरुषों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय हरने वाली देवी ! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए दयार्द्र रहता हो।।2।।  
 
      नारायणी ! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हो। कल्याणदायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है।।3।। 

       शरण में आये हुए दीनों एवं पीड़ितों  रक्षा में संलग्न रहने वाली तथा सब की पीड़ा दूर करने वाली नारायणि देवि ! तुम्हें नमस्कार है।।4।।

       सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से संपन्न दिव्यरूपा दुर्गे देवि ! सब भयों से हमारी रक्षा करो ; तुम्हें नमस्कार है।।5।।

         देवि !  प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हो और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो। जो लोग तुम्हारी शरण में जा चुके हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं। तुम्हारी शरण में गए हुए मनुष्य दूसरों को शरण देने वाले हो जाते हैं।।6।। 

          सर्वेश्वरी ! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो।।7।।

।।श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्ण।।
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44. मिथिला के लोकप्रिय कवि विद्यापति रचित - गोसाओनिक गीत (Gosaonik Geet) अर्थ सहित

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39. तुलसीदास - अनोखे रस - लालित्य के कवि

38. छठ महापर्व - The great festival of Chhath

37. भगवती प्रार्थना - बिहारी गीत (पाँच वरदानों के लिए)

36. सावन में पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक




25. भगवती स्तुति। .... देवी दुर्गा उमा, विश्वजननी रमा......

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24. कृष्ण -जन्माष्टमी -- परमात्मा के पूर्ण अवतार का समय। 

23. क्या सतयुग में पहाड़ों के पंख हुआ करते थे?

22. सावन में शिवपूजा। ..... Shiva Worship in Savan  

21. सद्गुरु की खोज ---- Search of a Satguru! True Guru!

20. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अद्भुत कथा  ....
(The great doctors of Gods-Ashwinikumars !). भाग - 4 (चिकित्सा के द्वारा चिकित्सा के द्वारा अंधों को दृष्टि प्रदान करना)
19. God does not like Ego i.e. अहंकार ! अभिमान ! घमंड !

18. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -3 (चिकित्सा के द्वारा युवावस्था प्रदान करना)

17. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -2 (चिकित्सा के द्वारा युवावस्था प्रदान करना)


16. बाबा बासुकीनाथ का नचारी भजन -Baba Basukinath's "Nachari-Bhajan" !

15. शिवषडक्षर स्तोत्र (Shiva Shadakshar Stotra-The Prayer of Shiva related to Six letters)

14. देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों की अदभुत कथा (The great doctors of Gods-Ashwinikumars !)-भाग -१ (अश्विनीकुमार और नकुल- सहदेव का जन्म)

13. पवित्र शमी एवं मन्दार को वरदान की कथा (Shami patra and Mandar phool)

12. Daily Shiva Prayer - दैनिक शिव आराधना

11. Shiva_Manas_Puja (शिव मानस पूजा)

10. Morning Dhyana of Shiva (शिव प्रातः स्मरण) !

09. जप कैसे करें ?

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08. पूजा में अष्टक का महत्त्व ....Importance of eight-shloka- Prayer (Ashtak) !

07. संक्षिप्त लक्ष्मी पूजन विधि...! How to Worship Lakshmi by yourself ..!!

06. Common misbeliefs about Hindu Gods ... !!

05. Why should we worship Goddess "Durga" ... माँ दुर्गा की आराधना क्यों जरुरी है ?

04. Importance of 'Bilva Patra' in "Shiv-Pujan" & "Bilvastak"... शिव पूजन में बिल्व पत्र का महत्व !!

03. Bhagwat path in short ..!! संक्षिप्त भागवत पाठ !!         {Listen it in only three minutes on YouTube}

02. What Lord Shiva likes .. ? भगवान शिव को क्या क्या प्रिय है ?

01. The Sun and the Earth are Gods we can see .....




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